कीचड़ भरे चकमार्ग में फंसी मासूमों की शिक्षा, ओठगी गिधार के बच्चे जान जोखिम में डालकर जा रहे स्कूल, BDO से मरम्मत की मांग
1 min read
प्रयागराज।शंकरगढ़ विकास खंड के ओठगी गिधार गांव के नन्हें-मुन्ने बच्चों के लिए शिक्षा की राह आसान नहीं है। बसहाई गांव के नाम गिधार गांव में बने प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचने के लिए बच्चों को रोजाना कीचड़ और गड्ढों से भरे सरकारी चकमार्ग से गुजरना पड़ता है। बच्चों के पास स्कूल जाने के लिए दूसरा कोई रास्ता नहीं है, जिससे वे हर दिन जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं।ग्रामीणों ने बताया कि यह चकमार्ग एक गांव से दूसरे गांव को जोड़ने वाला मुख्य संपर्क मार्ग है। पूर्व प्रधान विमला देवी के कार्यकाल में मनरेगा योजना के तहत इस चकमार्ग पर मिट्टी डालकर समतलीकरण कराया गया था, जिससे कुछ समय तक आवागमन सुगम रहा। लेकिन बीते दिनों लगातार हुई बारिश और किसानों द्वारा खेतों की जुताई के लिए ट्रैक्टरों के भारी आवागमन के कारण पूरे रास्ते में जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से रास्ता दलदल में तब्दील हो गया है। स्थिति ऐसी है कि बड़े लोगों का भी चलना मुश्किल हो गया है, तो छोटे-छोटे बच्चों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। स्कूली बच्चे रोजाना घुटनों तक कीचड़ में सने कपड़ों में स्कूल पहुंचते हैं। कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं और उनकी किताबें-कापियां भी कीचड़ में खराब हो जाती हैं। अभिभावकों में हर समय अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ स्कूली बच्चों की ही नहीं है, बल्कि पूरे गांव के लोगों को इसी रास्ते से बाजार, खेत और अन्य जरूरी कामों के लिए आना-जाना पड़ता है। मरीजों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। कई बार शिकायत के बाद भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।ऐसे में ओठगी गिधार गांव के ग्रामीणों और बच्चों के अभिभावकों ने खंड विकास अधिकारी शंकरगढ़ से अपील की है कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस सरकारी चकमार्ग को अति शीघ्र आवागमन योग्य बनाया जाए। चकमार्ग पर मिट्टी, मोरम डालकर समतल कराया जाए और जल निकासी की उचित व्यवस्था की जाए, ताकि नन्हें-मुन्ने बच्चे सुरक्षित रूप से शिक्षा प्राप्त कर सकें।
प्रयागराज
