दवा दुकानों के लिए वेबसाइट बनाने के आदेश पर पुनर्विचार की मांग, ड्रग डीलर्स वेलफेयर सोसायटी ने भेजा पत्र
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गाजीपुर। ड्रग डीलर्स वेलफेयर सोसायटी गाजीपुर की ओर से मंगलवार को सोसायटी के महामंत्री अश्वनी राय ने आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को पत्र भेजकर आदेश पत्रांक FSDA/AO/2026-27/938, दिनांक 1 अक्टूबर 2026 पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने आदेश को अव्यावहारिक बताते हुए तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का अनुरोध किया है।
पत्र में अश्वनी राय ने कहा है कि उक्त आदेश के तहत प्रत्येक रिटेल फार्मेसी को सार्वजनिक वेबसाइट बनाकर उस पर लाइसेंस, फार्मासिस्ट की फोटो, साप्ताहिक स्टॉक और PTR-PTC मूल्य सूची सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया है। सोसायटी का मानना है कि यह व्यवस्था छोटे दवा कारोबारियों के लिए व्यावहारिक नहीं है और इससे केमिस्ट समाज को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने तर्क दिया कि ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO), 2013 के प्रस्तर-25 में दुकान पर मूल्य सूची प्रदर्शित करने का प्रावधान है, लेकिन वेबसाइट बनाने की अनिवार्यता का उल्लेख नहीं है। ऐसे में इस तरह का निर्देश छोटे कारोबारियों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों के केमिस्टों को होगी परेशानी
अश्वनी राय ने पत्र में उल्लेख किया कि जनपद के लगभग 70 प्रतिशत केमिस्ट ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। ऐसे में प्रत्येक दुकान के लिए वेबसाइट बनाना, उसका नियमित रखरखाव करना और स्टॉक संबंधी जानकारी लगातार अपडेट करना कठिन होगा। इससे छोटे दवा विक्रेताओं पर आर्थिक और तकनीकी बोझ बढ़ेगा।
व्यापारिक गोपनीयता प्रभावित होने की आशंका
सोसायटी ने PTR-PTC मूल्य सूची सार्वजनिक किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि इससे निर्माता और स्टॉकिस्ट की व्यापारिक नीतियों तथा मूल्य संबंधी जानकारियों के सार्वजनिक होने की आशंका है, जिससे कारोबार में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि इस विषय से संबंधित मामला माननीय उच्चतम न्यायालय में W.P. (C) 717/2026, संजय कुलश्रेष्ठ के नाम से लंबित बताया गया है। सोसायटी के अनुसार, मामले में अंतिम निर्णय आने से पहले इस प्रकार का कठोर आदेश लागू करना उचित नहीं होगा।
निर्माता और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग
अश्वनी राय ने कहा कि अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और खरीद मूल्य के बीच अंतर के लिए खुदरा दवा विक्रेताओं को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उनके अनुसार, निर्माता की ओर से दी जाने वाली छूट और मूल्य निर्धारण से जुड़े मामलों में संबंधित नियामक एजेंसियों, जैसे CDSCO और NPPA, को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
सोसायटी ने मांग की है कि किसी भी रिटेल फार्मेसी का उत्पीड़न न किया जाए और संबंधित आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर उस पर पुनर्विचार किया जाए। अश्वनी राय ने कहा कि दवा कारोबारी शासन और प्रशासन के साथ हैं, लेकिन अव्यावहारिक आदेश से पूरा केमिस्ट समाज आहत है।
इस पत्र की प्रतिलिपि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
रिपोर्टर Ain भारत न्यूज Gazipur
