27 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष, पितरों के तर्पण और श्राद्ध की तैयारियां शुरू
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गाजीपुर। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इस वर्ष 27 सितंबर से पितृ पक्ष का शुभारंभ होगा। इसके साथ ही लोग अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति और श्रद्धापूर्वक स्मरण के लिए श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान की तैयारियों में जुट गए हैं।
मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान अपने दिवंगत पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण कर तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पितृ पक्ष में परिवार के लोग अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि के अनुसार निर्धारित तिथि पर श्राद्ध कर्म करते हैं। जिन लोगों को पूर्वजों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती, वे सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध करते हैं।
पितृ पक्ष के दौरान लोग प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होकर विधि-विधान से पितरों को जल अर्पित करते हैं। ब्राह्मणों को भोजन कराने, जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र एवं अन्य सामग्री दान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में सात्विक जीवन व्यतीत करते हुए पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए।
पितृ पक्ष को लेकर गाजीपुर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। श्राद्ध कर्म के लिए आवश्यक पूजन सामग्री, तिल, कुश, पुष्प, फल एवं अन्य सामग्री की मांग बढ़ने की संभावना है। घाटों और धार्मिक स्थलों पर भी तर्पण एवं पिंडदान के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ेगी।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार पितृ पक्ष केवल कर्मकांड का अवसर नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और परिवार की परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी अवसर है।
रिपोर्टर Ain भारत न्यूज मुहम्मद खालिद
